एक बनो, नेक बनो और संकल्पित रहो
हम सब एक हैं, हम नेक हैं
उत्तम विचार प्रवाह ही मेरे दैनिक जीवन का आधार रहे हैं। इसके लिए मैं स्वयं को समाज के लिए समर्पित करते हुए समाज का सहयोग एवं मार्गदर्शन करना अपनी नैतिक जिम्मेदारी के रूप में स्वीकार करता हूँ।
हम समाज की एक स्थापित इकाई हैं, न किसी से अधिक और न ही किसी से कम। 3000 से अधिक गाँवों को अपने साथ समेटे हुए हम सभी जाट समान हैं—न कोई छोटा, न कोई बड़ा, न कोई ऊँचा, न कोई नीचा, न कोई आगे और न ही कोई पीछे।
विश्व के प्रत्येक देश तथा भारत के प्रत्येक गाँव और शहर में बसे अपने सजातीय बन्धुओं के मन में यह भावना विकसित करनी चाहिए कि हम सब एक हैं, हम नेक हैं तथा वीर, गंभीर, धीर और प्रतिभावान बनते हुए सभी को समान रूप से आगे बढ़ाने में सहयोग करेंगे।
जातीय एकता को सशक्त करते हुए हमें समाज के छोटे-छोटे संगठनों को भी एक बैनर के नीचे लाकर एक मजबूत संगठन बनाने का सतत प्रयास करना चाहिए।
योजनाकार बनने का संकल्प
कोई भी मंत्र बिना अक्षरों के नहीं बनता और कोई भी औषधि बिना जड़ों के नहीं बनती। प्रभु परमेश्वर की बनाई इस प्रकृति में कोई भी व्यक्ति अयोग्य नहीं है। केवल योजनाकार दुर्लभ होते हैं।
यदि मन में यह संकल्प जाग जाए कि "मैं भी योजनाकार बन सकता हूँ", तो मेरा विश्वास है कि स्वयं प्रभु परमेश्वर भी आपका मार्ग प्रशस्त करेंगे।
सामाजिक उत्तरदायित्व
हिंसा, आतंकवाद, अंधविश्वास तथा दहेज प्रथा, सती प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या, बाल विवाह, नशा और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों का विरोध करते हुए विधवा विवाह को प्रोत्साहित करना हम सभी का सामाजिक दायित्व है।
ऐसी विचारधारा को समाज में स्थापित करना आवश्यक है जिससे सामाजिक ताने-बाने के रिश्ते पुनः मजबूत हो सकें।
परिवार और समाज
आज चाचा, ताऊ, मामा, मौसा और फूफा जैसे रिश्तों का अपनापन कम होता दिखाई दे रहा है। हम धनार्जन को ही लक्ष्य बनाते जा रहे हैं, वहीं परिवारों का आकार भी छोटा होता जा रहा है। यदि हमारी संख्या घटेगी तो हमारी सामूहिक शक्ति भी कम होगी।
आइए, आज से ही अपने परिवार और समाज से शुरुआत करते हुए एक नए सामाजिक अभियान का संकल्प लें।
एकता ही संगठन की शक्ति है
समाज में एकता से ही संगठन शक्ति का विकास होता है। इसी शक्ति के बल पर हम समाज को विकास, उन्नति, प्रेम, भाईचारे और सद्भावना के मार्ग पर आगे बढ़ा सकते हैं।
अपने बच्चों के विवाह सनातन परम्पराओं एवं सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार सम्पन्न करें तथा अनावश्यक दिखावे और अत्यधिक शोर-शराबे से बचें।
हमारा संकल्प
समाज के उत्थान में अपनी क्षमता के अनुसार योगदान देना हम सभी का कर्तव्य है। स्वस्थ, निरोगी, क्रियाशील, सदाचारी और शाकाहारी जीवन अपनाते हुए पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी, लगन और विश्वास के साथ समाज सेवा करें। यदि हमारी भावना पवित्र होगी, तो प्रभु परमेश्वर का आशीर्वाद और सहयोग अवश्य प्राप्त होगा।
राष्ट्रीय महासचिव (संगठन)